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शेयर बाजार में हड़कंप: ट्रंप के टैरिफ से Nifty गिरा 24,350 के नीचे, Sensex 700 अंक टूटा

ट्रंप के 50% टैरिफ का असर: क्यों गिर गया Nifty और Sensex?

7 अगस्त 2025 को भारतीय शेयर बाजार में एक जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। निवेशक उस समय हैरान रह गए जब Nifty50 24,350 के नीचे चला गया और BSE Sensex 700 अंकों से ज्यादा गिर गया। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ को माना जा रहा है।

क्या है 50% टैरिफ विवाद?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नए चुनावी अभियान के दौरान भारत सहित कई देशों पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। भारत से अमेरिका को भेजे जाने वाले कई प्रमुख उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लगाया गया है। इसमें खासतौर पर टेक्सटाइल, गहने, समुद्री उत्पाद, ऑटो पार्ट्स और केमिकल्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इस घोषणा का असर सीधा भारतीय कंपनियों पर पड़ा है जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। यही कारण है कि निवेशकों में घबराहट फैल गई और बाजार में बिकवाली का दौर शुरू हो गया।

Nifty और Sensex पर अमेरिका के टैरिफ का असर, निवेशकों में बेचैनी

बाजार की ताज़ा स्थिति

  • Nifty50 लगभग 222 अंकों की गिरावट के साथ 24,350 के नीचे बंद हुआ।
  • Sensex 700 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ करीब 79,850 के स्तर पर आ गया।
  • छोटे और मिडकैप स्टॉक्स में भी भारी गिरावट देखी गई।
  • कुछ सेक्टरों के स्टॉक्स जैसे टेक्सटाइल और गहनों में 4% से 6% तक गिरावट देखी गई।

किन सेक्टरों को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?

  1. टेक्सटाइल सेक्टर: अमेरिकी बाजार पर निर्भर कंपनियों को बड़ा झटका।
  2. ज्वेलरी और हीरे: निर्यात महंगे होने से मांग घट सकती है।
  3. सीफूड: मरीन प्रोडक्ट निर्यात करने वालों को बड़ा नुकसान।
  4. ऑटो पार्ट्स और केमिकल इंडस्ट्री: इनका भी मार्जिन प्रभावित हो सकता है।

निवेशकों की चिंता बढ़ी

इस तरह की नीतिगत घोषणाओं से विदेशी निवेशक भी सतर्क हो जाते हैं। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और वहां से ऐसा कोई भी निर्णय ग्लोबल निवेश भावनाओं को प्रभावित करता है। यही कारण है कि भारतीय शेयर बाजार में भी इसका असर दिखाई दिया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टैरिफ नीति वास्तव में लागू हो जाती है, तो भारतीय निर्यातकों की आय में गिरावट आएगी, जिससे कंपनी के शेयरों पर दबाव बना रहेगा।

सरकार की प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत अपने हितों की रक्षा के लिए WTO में मुद्दा उठा सकता है। साथ ही, केंद्र सरकार व्यापारिक कूटनीति के ज़रिए इस मामले को हल करने की कोशिश करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी संकेत दिया कि भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में और तेज़ी से कदम बढ़ाएगा ताकि वैश्विक दबावों से देश की अर्थव्यवस्था कम प्रभावित हो।

आगे क्या हो सकता है?

  • अगर अमेरिका ने यह टैरिफ लागू किया, तो भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय हो सकता है।
  • भारत यूरोप, मिडिल ईस्ट और एशिया के देशों के साथ व्यापार बढ़ा सकता है।
  • विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है।

निवेशकों के लिए सलाह

  • घबराएं नहीं: बाजार में गिरावट आम बात है।
  • लॉन्ग टर्म सोचें: मजबूत कंपनियां उबर सकती हैं।
  • डायवर्सिफिकेशन करें: एक ही सेक्टर पर निर्भर न रहें।

निष्कर्ष

ट्रंप के 50% टैरिफ का असर सिर्फ व्यापार पर नहीं, बल्कि निवेशकों की भावना और बाजार की चाल पर भी पड़ा है। यह गिरावट हमें यह याद दिलाती है कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का आपस में गहरा संबंध है। हालांकि भारत के पास इस चुनौती से निपटने के विकल्प हैं, लेकिन फिलहाल के लिए बाजार में सतर्कता और समझदारी से कदम उठाना बेहद जरूरी है।

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