पहले दिन हम माँ शैलपुत्री की पूजा करते हैं। वे शक्ति और धैर्य की देवी हैं, जो संकटों को दूर करती हैं। भोग में दूध और हलवा चढ़ाएं। इस दिन का शुभ रंग पीला है।
दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी का व्रत होता है। वे तप और संयम की देवी हैं और साधकों को ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं। भोग में फल, मीठा और दूध अर्पित करें। शुभ रंग सफेद है।
तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना होती है। उनका मस्तक अर्धचंद्र से सजा होता है। वे साहस और भय नाश की देवी हैं। भोग में हलवा, नारियल और पुष्प चढ़ाएं। शुभ रंग नारंगी / पीला है।
चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा होती है। वे ऊर्जा और स्वास्थ्य देने वाली देवी हैं। भोग में फल, हलवा, जौ और फूल अर्पित करें। शुभ रंग नारंगी / हल्का लाल है।
पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की आराधना होती है। वे माता और पुत्र की कृपा देती हैं। भोग में दूध, फल और हलवा चढ़ाएं। शुभ रंग हल्का नीला है।
छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है। वे बुराई नाश और शक्ति का प्रतीक हैं। भोग में लाल फूल, हलवा और मीठा अर्पित करें। शुभ रंग नीला है।
सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा होती है। उनका रूप उग्र है लेकिन भक्तों के लिए मंगलकारी है। भोग में तेल, लाल फूल और हलवा चढ़ाएं। शुभ रंग काला है।
आठवें दिन माँ महागौरी की आराधना होती है। वे शांति, सौंदर्य और पवित्रता की देवी हैं। भोग में दूध, चावल, हलवा और फूल अर्पित करें। शुभ रंग सफेद / हल्का गुलाबी है।
नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है। वे सभी सिद्धियाँ और समृद्धि देने वाली देवी हैं। भोग में मीठा, फल, फूल और दीपक अर्पित करें। शुभ रंग हल्का पीला / सुनहरा है।